भाग एक
फिल्म 'बरसात" के सुपरहिट गीत 'बरसात में तुमसे मिल हम सजन बरसात में तक धिना" से 'ऑन द रूफ इन रेन" तक फिल्मों में बरसात आधारित गीतों का अहम रोल रहा है। कुछ गाने ऐसे भी हैं जिनमें बारिश का जिक्र तो नहीं है लेकिन नायिका को जमकर बारिश में भिगोया है। यश राज की फिल्मों में बारिश तो सबसे अहम चीज है। इन दिनों मानसून लगभग पूरे देश में छाया है जहां पानी नहीं बरस रहा है वहां लोग टकटकी लगाए उसका इंतजार कर रहे हैं। आइए आज मानसूनी गीतों की चर्चा हो जाए।
प्यार हुआ इकरार हुआ
श्री 420 का यह गाना अब तक सर्वश्रेष्ठ रेन सॉन्ग है। नरगिस और राजकपूर एक छतरी के नीचे, मुसलाधार बारिश। चाय वाले की केटली से निकलती भाप। वाह क्या सीन है। जैसा गाना है वैसा ही संगीत। एक दम फुहारों जैसा। शैलेंद्र के बोल और शंकर जयकिशन की धुन ने वाकई जादू कर दिया है। 'मैं ना रहूंगी तुम ना रहोगे फिर भी रहेगी निशानियां....."। तभी कैमरे का एंगल चेंज होता है और तीन नन्हें बच्चों को रेनकोट में दिखाया जाता है। जो कपूर खानदान के ही चिराग हैं।
इक लड़की भीगी भागी सी
चलती का नाम गाड़ी का यह गाना भी वाकई अद्भुत है। किशोर कुमार और मधुबाला की कैमिस्ट्री भी गजब है। भीगी साड़ी मंे मधुबाला को देखकर किशोर दा का गाना गाना। मधुबाला की बिगड़ी कार की मरम्मत करना तो कभी उन्हें छुपकर निहारना। मजरूह साहब के शब्दों को सचिन दा बखूबी धुन में पिरोया है।

एक लड़की भीगी भागी सी
सोती रातों में जागी सी
मिली इक अजनबी से
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात है...।
दिल ही दिल में जली जाती है बिगड़ी बिगड़ी चली आती है
झूंझलाती हुई बलखाती हुई, सावन की सुनी रातों में।।
डगमग डगमग लहकी लहकी, भूली भटकी बहकी बहकी
मचली मचली घर से निकली, पगली सी काली रात में।।
तन भीगा है, सर गीला है उसका कोई पेंच भी ढीला है
तनती झुकती चलती रुकती निकली अंधेरी रात में।।
क्रमश: