Ek Nazar

Related Posts with Thumbnails
Showing posts with label shammi kapoor. Show all posts
Showing posts with label shammi kapoor. Show all posts

Saturday, December 18, 2010

धीरे-धीरे.... ये रही प्रेमी की गाई लोरी

हिंदी फिल्मों में हर इक मौके में गाने रखे जा सकते है। शादी के गीत, सगाई के गीत, प्यार के गीत, बिछुड़ने के गीत, मस्तीभरे गीत और देशभक्ति के गीत। इसके अलावा भक्ति गीत, पिकनीक, बर्थडे, डांडिया, भांगड़ा, लावणी और जितनी सिचुएशन आप सोच सकते है उतने गीत। फिल्मों में लोरियों का भी अहम स्थान है।
ज्यादातर लोरियां मां ही गातीं हैं। कहीं-कहीं पिता को भी गाते दिखाया गया है। ब्रह्मचारी में शम्मी कपूर 'अंकल" वाली लोरी गाते हैं। लेकिन फिल्मों में प्रेमी को लोरी गाते दिखाया गया है। बात भले ही चौंकाने वाली लगे पर यह सौ फीसदी सच है। आप की राय थोड़ी अलग हो सकती है। ऐसी सिचुएशन दो बार फिल्मों में दिखाई गई है जहां प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए लोरी गा रहा है, यह बात अलग 'लोरी" के अंत में प्रेमिका की नींद भंग हो जाती है। वाह क्या सीन है। चलिए ज्यादा पहेलियां न बुझाते हुए आपको बता ही देते हैं।
1943 में बॉम्बे टॉकिज ने एक फिल्म बनाई थी 'किस्मत"। फिल्म के मुख्य कलाकार थे अशोक कुमार, मुमताज शांति, शाह नवाज। इस फिल्म को हिंदुस्तान ने सबसे बड़ी हिट फिल्म माना जाता है। उस समय इस फिल्म ने कई रेकॉर्ड बनाए थे। कलकत्ता (अब कोलकाता) में यह फिल्म लगातार तीन साल तक चली थी और इसने उस समय इस फिल्म ने एक करोड़ रुपए की कमाई की थी। फिल्म में संगीत अनिल बिस्वास का था और गीत लिखे थे कवि प्रदीपजी ने। आपको इस फिल्म का सदाबहार गाना 'दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है" तो याद ही होगा। इसके अलावा एक गीत और जो आज भी पुराने फिल्मों के रसिकों की जुबां पर हमेशा रहता है। वह है 'धीरे-धीरे आ रे बादल धीरे आ, मेरा बुलबुल सो रहा है शोर गुल न मचा।" अशोक कुमार और आमीरबाई कर्नाटकी की आवाज में यह गीत बड़ा ही सुखद लगता है। नायिक सो रही है और नायक गरजते बादलों ने कह रहा है धीरे-धीरे आ रे बादल.... मेरा बुलबुल सो रहा है शोर गुल न मचा। यह एक लोरीनुमा गीत है जो नायक गा रहा है। आज की फिल्मों में न तो ऐसी सिचुएशन पैदा की जा सकती है और न ही ऐसा गीत बन सकता है। शांत, मधुर एकदम कलकल बहते झरने की तरह।

दूसरा गीत है फिल्म ब्वॉय फ्रेंड का। 1961 में बनी इस फिल्म के मुख्य कलाकार थे शम्मी कपूर और मधुबाला। गीत हसरत जयपुरी के और संगीत शंकर जयकिशन का। यूं तो फिल्म के सारे गानों को शोहरत मिली। जैसे रफी साहब का गाया मुझे अपणा यार बना लो (तीन वर्जन)। सलाम आपकी मीठी नजर को सलाम। लेकिन फिल्म का सबसे ज्यादा हिट गाना था'धीरे चल धीरे चल ऐ.. भीगी हवा, मेरे बुलबुल की है नींद जवा।" इस लोरीनुमा गीत की सिचुएशन भी पहले जैसी ही है लेकिन इसमें नायिका गाती तो नहीं है पर चुपचाप नायक का गाना सुनकर मंद मंद मुस्कुराती रहती है। रफी साहब की आवाज में यह गीत और नीखर जाता है। शम्मी कपूर की अदाकारी और मधुबाला की अदा..... क्या ऐसे संयोजन की आज कल्पना की जा सकती है।